सुप्रसिद्ध लेखक, चिंतक, इतिहासकार और शहीद भगत सिंह के भांजे प्रोफ़ेसर जगमोहन सिंह पहुंचे इंदौर, शहीद सआदत खां के मज़ार व शहीद स्मारक पर पेश किए अकिदत के फुल
शहीद सआदत खां के वंशजों के साथ शहीद भगत सिंह के भांजे प्रोफेसर जगमोहन सिंह

सुप्रसिद्ध लेखक, चिंतक, इतिहासकार और शहीद भगत सिंह के भांजे प्रोफ़ेसर जगमोहन सिंह पंजाब के शहर लुधियाना से गणतंत्र दिवस से पूर्व एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने जब इंदौर आए तो स्वयं को शहीद सआदत खां के स्मारक और मजार पर हाजरी देने से रोक न सके।प्रोफेसर साहब ने 1857 की क्रांति के महानायक शहीद सआदत खां के वंशजों रिजवान खान और खिलजी खालिद खान से आत्मीय मुलाकात की। प्रोफेसर जगमोहन साहब एक विचारवान विद्वान भी है। देश-दुनिया के मौजूदा हालात के साथ ही उनसे शहीद भगत सिंह जी के विचारों और आज सौ बरस पहले यानी 1925 के हालातों को भी जानने का मौका मिला, उन्होंने बताया कि भगत सिंह जी नवयुवकों को लेकर बड़े फिक्रमंद थे उन्होंने लाहौर में एक संगठन बनाया और 1000 युवाओं को इस से जोड़ा, उसी दौरान बाबा साहब भीमराव अंबेकर महाराष्ट्र में अपने लोगों को शिक्षित करने पर ज़ोर दे रहे थे, तो दक्षिण भारत के तमिलनाड से उत्तर भारत आए पेडियार का भी जिक्र किया जब उन्हें उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए ब्राह्मण का भेष धारण करना पड़ा लेकिन पकड़े जाने पर वापस अपने प्रांत लौटकर अपने लोगों को जागृत करने में समय लगाया, उन्होंने बताया कि इसी तरह जब 1925 में देश में ब्रिटिश हुकूमत को कमजोर करने के संगठनात्मक रूप में सकारात्मक कार्य हो रहे थे तो वहीं आरएसएस जैसी अलगाववादी ताकतें भी पैदा हो रहीं थी। प्रोफेसर साहब अभिनव कला समाज भवन में एक कार्यक्रम में भी शामिल हुए जहां उन्होंने कई पत्रकारों के सवालों का अपने अंदाज में जवाब भी दिया।
प्रोफेसर जगमोहन साहब पहले भी एक कार्यक्रम में जब इंदौर आए थे तो एक राष्ट्रीय अखबार को अपने इंटरव्यू में कहा था कि इस शहर की पहचान खानपान नहीं शहीद सआदत खां से होनी चाहिए , जिसने इस मातृ भूमि को आजाद कराने के लिए अपना सर्वस्व निछावर कर दिया। शहीद सआदत खां के वंशजों में प्रोफेसर साहब की मुलाकात रियाज खान, ताहिर खिलजी और आज़म खान से भी हुई। freeslots dinogame telegram营销